राधारानी: 1930 – 40 के दौर की एक बेहतरीन अभिनेत्री की ज़िन्दगी की दास्तान

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By Filmi Khan

राधारानी
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हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक ही नाम के भ्रम के मामलों से भरा पड़ा है, ख़ासकर 30 और 40 के दशकों के दौरान. इस दौरान की एक्ट्रेस रहीं- राधारानी. एक ही नाम और एक ही अवधि में सक्रिय दो अदाकाराएं थीं. उनमें से एक अभिनेत्री कलकत्ता और दूसरी बम्बई से थीं. अदाकारा राधारानी की पैदाइश का सही साल का तो नहीं पता चलता है लेकिन 1920 से 21 में या उसके आस पास क्वेटा, बलूचिस्तान अब यह जगह पाकिस्तान में है में हुई थी. इनके वालिद साहब ब्रिटिश नेशनल थे और सैन्य अधिकारी थे और उनकी माँ इंडियन थीं.

सिनेमा के शुरुवाती युग की एक सम्पूर्ण अदाकारा थीं राधारानी

वह पूरी तरह से इंडियन दिखती थीं. उनकी शुरुवाती एजुकेशन मुंबई में हुई और बहुत जल्द ही वह घुड़सवारी, साइकिल चलना, ड्राइविंग और स्केटिंग में माहिर हो गयीं. अभी वह स्कूल में ही थीं कि उन्हें फ़िल्मों के ऑफर आने शुरू हो गए. उनकी पहली फ़िल्म रोमांटिक इंडिया थी जोकि 1936 में रिलीज़ हुई थी. वह एक बहुत अच्छी सिंगर भी थीं और अपनी फ़िल्मों के लिए ख़ुद ही गाती थीं. उनकी दूसरी फ़िल्म बढे चलो थी जो 1937 में रिलीज़ हुई थी.

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राधारानी ने हिंदी ही नहीं कई और भाषाओँ की फ़िल्मों में काम किया

इसी साल उनकी कलकत्ता के प्रोडक्शन हाउस में बानी फ़िल्म स्वराज के सिपाही में काम किया. इन फ़िल्मों से वह इतना मशहूर हो गयीं कि उन्हें हर भाषा की फ़िल्म बनाने वाला प्रोडूसर-डायरेक्टर अपनी फ़िल्म में लेना चाहता था. 1938 में उनकी एक तेलुगु फ़िल्म भक्त-जयदेव रिलीज़ हुई और इसी साल वह मुंबई वापस आकर वाडिया मूवीटोन के साथ अनुबंधित हो गयीं और इसी साल उनकी फ़िल्म सुनहरे बाल रिलीज़ हुई और फिर यहाँ उन्होंने 7 स्टंट/एक्शन फिल्में कीं. इसके बाद उन्होंने इस प्रोडक्शन हाउस से अपना अनुबंध या कॉन्ट्रैक्ट तोड़ दिया और फ्रीलांसर के तौर पर काम करने लगीं और विभिन्न बैनर्स की और 18 फिल्मों में काम किया. उन्होंने उस वक़्त बनने वाली लगभग हर भाषा की फ़िल्म में काम किया. उन्होंने 1941 में बनी पंजाबी फ़िल्म कुरमाई में भी काम किया. स्कूल से लेकर सिल्वर स्क्रीन तक उनका सफर बेहद शानदार रहा उन्होंने अपनी लगभग हर फ़िल्म से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. उन्हें अंग्रेजी साहित्य पढ़ने का बहुत शौक था और शूटिंग में ब्रेक के दौरान वह खूब किताबें पढ़ा करती थीं. फ़िल्मी परदे पर उनकी जोड़ी निर्देशक -अभिनेता ज़हूर राजा के साथ खूब जमी. इस जोड़ी ने लगभग 8 फ़िल्मों में साथ काम किया.

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अदाकारा राधारानी ने ज़हूर अहमद के साथ सबसे ज़्यादा काम किया

उन्होंने ज़हूर राजा के प्रोडक्शन कंपनी की 3 फ़िल्मों में काम किया और इस जोड़ी की सबसे मक़बूल फ़िल्म बादल (1942) रही जिसे ज़हूर राजा ने ही निर्देशित किया था. राधा रानी की आख़िरी फ़िल्म रसीली रही जोकि 1946 में रिलीज़ हुई थी, इस फ़िल्म उनके साथ साथ कन्हैया लाल और शुशील कुमार थे. इस फिल्म के बाद उन्होंने शादी कर ली और इंग्लैंड चली गईं. वह अभी बाहयात हैं या इस दुनिया से रुख़सत हो गयीं इसकी कोई जानकारी कहीं नहीं मिलती है. अगर उनकी फ़िल्मों की बात की जाये तो उन्होंने- रोमांटिक इंडिया-1936, बढ़े चलो-1937, स्वराज के सिपाही-1937, भक्त जयदेव-1938 (तेलुगु), सुनेहरा बाल-1938, कहां है मंजिल तेरी-1939, हिंद का लाल-1940, डायमंड क्वीन-1940, जय स्वदेश-1940, बंबईवाली-1941, मंथन-1941, सफेद सवार-1941, सीधा रास्ता-1941, दर्पण-1941, कुर्मई-1941(पंजाबी), स्वामी-1941, बादल-1942, मोटरवाली-1942, सेवा-1942, सुहागन -1942, जंगलराज-1942, मजाक-1943, श्री झटपट-1943, पराया धान-1943, सावल-1943, भाई-1943, ओ पंछी-1944, ग़ज़ल-1945, लाज-1946 और रसीली-1946 जैसी फिल्मों में काम किया.
उनकी फ़िल्म बादल के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि इस शीर्षक से क़रीब 5 बार फ़िल्में बनीं. पहली बार 1942 में, फिर 1951, 1966, 1985 और फिर 2000 में बनी.
दोस्तों अदाकारा राधारानी की ज़िन्दगी के बारे अगर आपको कोई जानकारी हो तो हमें कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताइयेगा.

Film Raseeli (1946) Song: https://www.youtube.com/watch?v=noODoun0x7E

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